सफलता बनाम असफलता
अक्सर देखा जाता है कि जल्दी सफलता पाने की होड़ में हम अपने यथार्थ से काफी दूर भाग जाते हैं।
सफलता के लिए निरंतरता बहुत ही जरुरी होता है। अक्सर हम सफल व्यक्तित्व को देख के प्रभावित हो जाते हैं कि काश उस जगह हम होते। लेकिन हम अगर उन महान सख्शियत के बारे में भी चर्चा करेंगे तो हमे यही पता चलेगा कि लगातार असफलता और उनके अथक प्रयास ने ही उनके सफलता में अहम् भूमिका निभाई है।
इस संसार में शायद ही कोई व्यक्ति हो जो ऊँचा न उठना चाहता हो। तो क्या सिर्फ हमारी सोच हमे उस जगह ले जा सकती है जहाँ हम जाना चाहते हैं।
ख़वाईशो का दायरा तो किसी का भी बड़ा हो सकता है पर उन्हें सच में तब्दील करना ही असल में सफलता है. कुछ ऐसे ही हम अपने बच्चो के लिए भी सपने संजो लेते हैं। एक ओर जहाँ हम बच्चो के सुखद भविष्य की कामना करते हैं तो दूसरी ओर उनसे जरुरत से ज्यादा अपेक्षाएँ भी रख लेते हैं। हम ये तक भूल जाते हैं कि हर व्यक्ति की काबिलियत अलग अलग होती है वरन आज इतने रोज़गार के मौके नहीं होते।
अब सवाल उठता है कि हम ऐसा क्या करें जिससे हम और हमारे बच्चे एक बेहतर कल का निर्माण कर सके।
1 सबसे पहले अपने बच्चे में ये भावना विकसित करे कि मैं कर सकता हूँ।
2 दूसरी बात उनकी रूचि जाने की वो बेहतर क्या कर सकते हैं।
३ वो अपनी ज़िन्दगी को किस नजरिये से देखते हैं
4. अपने बच्चो से खुल कर बात करें की वो जिस करियर को चुनने जा रहे हैं उसमें संभावनायें कितनी है और कितने प्रयास की उन्हें जरुरत है ताकि वो समय रहते ही अपने चुने हुए करियर पर पुनर्विचार कर सके।
5 . अपने बच्चो से दोस्ताना व्यवहार रखे और उनसे नियमित और निरंतरता जैसे शब्दों पर बात करें।
6 .सबसे अहम् है ये जांचे कि कही समय प्रवंधन में तो आपका बच्चा नहीं पिछड़ रहा ,यदि ऐसा है तो उन्हें उत्साहित करने वाली किताबे थोड़ी देर पढ़ने को कहे क्योकि हमारे दवारा बोले गए शब्द बच्चे को कई बार बुरे लग सकते हैं लेकिन किताबो में वही बाते पढ़ के उन्हें सीख मिलती है साथ ही साथ वे प्रभावित भी होते हैं।
आखिरी लेकिन सबसे जरुरी बात की अपने बच्चो की सँगति पर गौर करे. इन सब बातो का ध्यान रख कर हम अपने बच्चो के सपनो के साथ खुद के सपने साकार होते हुए भी देख सकते हैं।
क्योंकि हम अगर आज हैं तो हमारे बच्चे हमारा और इस देश का कल है। तो क्यों न एक बेहतर कल की नींव आज ही रखी जाये।
Ashafhalta ka swaad bra krwa hota h. bahut kam log us swaad ko dubaara chakhne ki himmat kr paate h. Jo baar baar use chakhta h oo uska aadi ho jata h. Fir whi safhalta ka parcham lahrata h.
ReplyDeleteasafalta hi safalta ki janni hai . Hume apni asafaltao se bahut sikh milti hai .
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