Wednesday, December 26, 2018

जीरो मूवी रिव्यू



जीरो मूवी अपने  नाम के मुताबिक  है। इसकी कहानी बउआ नाम  के एक बौने किरदार के आसपास घूमती है, जो कि मेरठ का रहने वाला है। बउआ ( शाहरुख़ खान ) को  आफिया  ( अनुष्का )  नाम की लड़की से प्यार हो जाता है जो कि वैज्ञानिक रहती है और सेरीब्रल पाल्सी नामक रोग से पीड़ित रहती है. दोनों में आसमान ज़मीन सा फर्क है , इसके बाबजूद दोनों की प्रेम कहानी भारत  की ज़मीन से  उठकर अमेरिका के अंतरिक्ष तक  जा पहुंचती है। मूवी में इन दोनों के प्यार के सफरनामे को अलग तरीके से दिखाया गया है. फिल्म में कैटरीना कैफ ( बबीता ) भी  है जो नशे में धुत होने के बाबजूद मोम की गुडिया लगी हैं लेकिन उनके पास दर्शको को लुभाने जैसा कोई अहम् भूमिका नहीं थी। इसके साथ  ही फिल्म में कई सहकलाकार भी जान डाले हुए हैं।
इस फिल्म  की कहानी को हिमांशु शर्मा ने लिखा है और इसका संगीत अजय अतुल ने दिया है.

अनूठा प्यार 

दर्शक अगर ये सोच के जा रहे मूवी देखने कि शाहरुख खान की मूवी है खूब इमोशन और रोमांस का तड़का होगा लेकिन ऐसा कुछ खास नहीं मिलने वाला है मूवी में। हलाँकि शाहरुख़ ने फिल्म के पहले चरण में लोगो को बांधने की काफी कोशिश की है , लेकिन फिल्म के दूसरे चरण में उनकी पकड़ थोड़ी ढीली पड़ गयी थी।
शाहरुख़ ने जहाँ फैन मूवी की याद ताज़ा की है वही अनुष्का ने वर्फी मूवी में प्रियंका चोपड़ा जोनस के अभिनय  की याद दिलाई।  काफी कोशिश की अनुष्का ने अपने किरदार को जीवंत करने की जो कि सराहनीय है लेकिन अगर प्रियंका  से  तुलना की जाये तो फीका रहा उनका किरदार। इस फिल्म में शाहरुख़ ३८ साल के युवा हैं जो अब तक कुंवारे हैं , माँ बाप  के साथ रहने की वजह से उन्हें कभी पैसो की दिक्कत नहीं हुई , वरन छोटे से शहर में ३८ साल का  कुंवारा  लड़का शायद ही मिलता  हैं , लेकिन  बउआ का कम कद का होना भी एक वजह है जल्दी  शादी का न होना।

बबीता कुमारी  का अविश्वसनीय  किस  बउआ को 











अनुष्का के एक डायलॉग ने दिल छू लिया की रिश्ता और प्यार बराबर में चलता है , मुझे भी इस अवस्था में कोई सही आदमी नहीं मिलने वाला और तुझे भी बौने के रूप में कोई प्यार नहीं कर सकता। बउआ का बौनापन यहाँ मजबूत पक्ष लेकर उभरा वरन आफिया  जैसी सुन्दर और होनहार  वैज्ञानिक के साथ रिश्ता तय हो जाना , ठीक वैसा ही है जैसे कहानियो में परियां मिल जाती है।  इस बीच कहानी का रुख कैटरीना कैफ ( बबीता कुमारी ) की तरफ चला जाता है।  बबीता  का क्या किरदार है ? बउआ को आफिया का प्यार ज़मीन में मिलेगा या अंतरिक्ष में इसके लिए आपको सिनेमा हॉल जाना   होगा ।  मूवी में मनोरंजन और अच्छा संगीत का मिश्रण है जो कि आपको बोरियत महसूस नहीं होने देगा। कुल मिला के ये मूवी थोड़ा सा अलग हटके है प्यार के अलग साइड इफेक्ट्स और अलग वादे को पुरी करती नज़र आएगी। ज़ीरो का अंत आखिर ज़ीरो में ही हुआ लेकिन बउआ  सिंह का कद काफी बड़ा हो गया फिल्म के अंत में। इस कहानी को मैं ५  में से ३ *** रेटिंग देना चाहूंगी।

No comments:

Post a Comment