Tuesday, December 11, 2018

उर्जित का त्यागपत्र - अर्थजगत को झटका


उर्जित  रवींद्र पटेल किसी परिचय के मोहताज नहीं , अर्थशास्त्र जगत में उन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्याति  प्राप्त है।इनका जन्म केन्या के नैरोबी( राजधानी ) में हुआ था। भारतीय रिजर्व बैंक के २४ वे गवर्नर बनने से पहले उर्जित आर पटेल केंद्रीय बैंक के डिप्टी गवर्नर थे। ४ सितम्बर २०१६ को इन्हे भारतीय रिजर्व बैंक का  गवर्नर  बनाया गया था । अचानक हुए नोटबंदी के निर्णय को भी पटेल जी ने बखूबी निभाया। उनकी  और उनकी  टीम की सुदृढ़ व्यवस्था अर्थशास्त्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। पटेल ने अपने सूझ बुझ से मुद्रा स्फीर्ति को स्थिर बना कर रखा था. अभी पटेल जी का कार्यकाल पूरा होने में ८ महीने बाँकी थे तो अचानक से  इस्तीफा दे देना , सरकार और अर्थजगत के लिए एक झटका है।  इससे कहीं न कहीं अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। सरकार त्वरित निर्णय नहीं ले सकती कि अगला गवर्नर  किसे बनाया जाये। हलाँकि अगर पटेल के कथानुसार सोचा जाये तो उन्होंने इस्तीफा  देना व्यक्तिगत मामला बताया है। लेकिन ये पूरी तरह से सच नहीं है ,  आर बी आई और सरकार में लगातार किसी बात को लेकर खींच तान चल रही थी , लम्बे खींच तान के बाद पटेल जी ने समझौता न करके इस्तीफ़ा का रास्ता इखतियार कर लिया।   आर बी आई  की स्वायत्तता और कमजोर बैंकों के प्रांप्ट करेक्टिव  एक्शन  फ्रेमवर्क में रखना जैसे मुद्दों को लेकर   सरकार और आर बी आई  में तकरार चल रही थी। अभी चुनावी माहौल में राजनीति सरगर्मियां तेज हो रही हैं।  इधर पटेल जी का इस्तीफ़ा और दुसरा एग्जिट पोल के नतीजे से सरकार और बाजार को दोहरी मार पड़ सकती है.
कुछ अहम् मुद्दे थे संप्रग सरकार और आर बी आई  के बीच जिसे पटेल ने सरकार के सामने रखा था

१. कृषि ऋण माफ़ी योजना
२ भारत में बैंकिंग को बैंकिंग सवामित्व अधिकार न होना
३ मौद्रिक दरों में उतार चढाव

इन मुद्दों के अलावा भी कई ऐसे मुद्दे थे जो टकराव  का कारण  बने बिना निष्कर्ष निकले।
जैसे आर बी  आई प्रशासनिक  सुधार ,  भुगतान प्रणाली के लिए मानक , आर्थिक पूंजी का ढांचा ,नियामकीय पूंजी मानक और पीएसबी बोर्डों पर आर बी आई का चयन।

उर्जित रवींद्र पटेल 


शुरुवात  में पटेल को लोग सरकार का करीबी मान रहे थे लेकिन अचानक आये मोड़ ने ये साफ़ कर दिया है कि    आर बी  आई  को हस्तक्षेप बर्दाशत नहीं या फिर यूँ कहे की सरकार की हाथो की कटपुतली बनना पसंद नहीं।
आर बी  आई गवर्नर  एक गरिमामयी पद है और इसकी नियुक्ति सरकार करती है।
सूत्रों की माने तो पटेल जी ने अपने आर बीआई के केंद्रीय निदेशक मंत्रिमंडल के निदेशकों का आभार जताया लेकिन सरकार को उन्होंने अनदेखा कर दिया।  इससे  साफ़ हो गया की इस्तीफे का कारण सिर्फ  व्यक्तिगत नहीं है।
 लेकिन वहीँ प्रधानमंत्री  मोदी जी और वित्त मंत्री  अरुण जेटली ने आश्चर्य जताया तो साथ ही साथ उन्होंने  उनके कार्य - कुशलता की सराहना भी की।
अब देखना ये होगा की पटेल की जगह कौन लेता है।

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