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Wednesday, March 20, 2019
SPARSH: पूर्वी सभ्यता बनाम पश्चिमी सभ्यता
SPARSH: पूर्वी सभ्यता बनाम पश्चिमी सभ्यता: पूर्वी सभ्यता बनाम पश्चिमी सभ्यता भारतीय संस्कृति विलुप्त होती जा रही है , लोगों का कहना है कि पश्चिमी सभ्यता ने भारत को अपने मोहपाश...
Tuesday, March 19, 2019
पूर्वी सभ्यता बनाम पश्चिमी सभ्यता
पूर्वी सभ्यता बनाम पश्चिमी सभ्यता
भारतीय संस्कृति विलुप्त होती जा रही है , लोगों का कहना है कि पश्चिमी सभ्यता ने भारत को अपने मोहपाश में जकड़ रखा है। लेकिन ये कहना कहाँ तक न्यायसंगत है ? समाज पूर्वी हो या पश्चिमी दोनों की अपनी संस्कृति है। चाहे देश कोई भी हो उसकी संस्कृति उसकी आत्मा होती है। किसी भी सिक्के के दो पहलू हो सकते हैं , अब इसमें हमे तय करना होता है की हम उनमे से किसका आवरण करते हैं। एक तरफ हम जहाँ गगन छूने की बातें करते हैं तो वही दूसरी ओर हमें पश्चिमीकरण का डर भी सताने लगता है. यहाँ हमे आरोप प्रत्यारोप करने की बजाय उन जड़ो तक पहुंचना होगा जिसने हमे पश्चिमी सभ्यता का रुख करने को बाध्य किया है। पश्चिमी संस्कृति से भी बहुत कुछ सीखा जा सकता है, जैसे उनके काम करने के तरीके , विज्ञान की दुनियां में उनके बढ़ते हुए कदम , नित्य नयी तकनीक का विकास। तकनीक का उपयोग और दुरूपयोग हमारे ऊपर निर्भर करता है ना कि पाश्चात्य सभ्यता को गलत ठहराया जा सकता है पूर्णरूप से। युवा वर्ग में तनाव ने अपनी एक खास जगह बना ली है , इसका कारण पाश्चात्य सभ्यता नहीं है बल्कि एकल परिवार है . दादी माँ की परियो की कहानी की जगह अब पब जी गेम ने ले लिया है , जिससे हमारे मानसिक संतुलन ठीक नहीं रह पाता है। भारत में बढ़ती बेरोजगारी सबसे अहम् मुद्दा है जो हमें पश्चिमीकरण की तरफ ढ़केल रहा है। कभी सोने की चिड़या कहा जाने वाला भारत एक कृषि प्रधान देश है , लेकिन बेहतर कृषि तब ही संभव है जब प्रकृति हमारा साथ दे और नयी तकनीक का हम सहारा ले सकें और अच्छी तकनीक के लिए हमें पश्चिमी सभ्यता को अपनाना होगा। हमारा भारत सभ्यता और संस्कृति के मामले सर्वश्रेष्ठ है, ये सर्वविदित है।
अब सवाल उठता है कि क्या भारत को विकसित देश होने के लिए पाश्चात्य की तरफ रुख करना सही है? क्या युवा वर्ग पाश्चात्य की तरफ रुख करके उनके गुलाम बनते जा रहे हैं ? मेरे हिसाब से किसी जगह की संस्कृति अपनाने का मतलब ये नहीं की हम अपनी जड़ो को ही हिला दें. आधुनिक सोच के साथ कपड़ों में सहूलियत के साथ कुछ बदलाव आना भी लाज़मी है लेकिन ये अब हम पर निर्भर करता है कि किसी दूसरे की संस्कृति को अपनाने में खुद की संस्कृति को गौण न कर दें. मात्र जीन्स या साड़ी के पहनावे मात्र से किसी भी इंसान की सभ्यता और संस्कृति नहीं बदल सकती। हमारा पोशाक चाहे जो भी हो बदलते ज़माने के हिसाब से हो सकता है पर उस पहनावे में फुहड़ता और सस्तापन नहीं होना चाहिए। ये पूरी तरह से किसी व्यक्ति विशेष के ऊपर निर्भर है कि वो भारत से बाहर जाकर भी अपनी संस्कृति से विमुख नहीं हो।
अचानक से हमें यहाँ इकबाल जी की कही हुई बात याद आ रही है :
" कुछ बात है कि ऐसी हस्ती मिटती नहीं हमारी "
हमें कोई हक़ नहीं बनता की हम दूसरों की संस्कृति को गलत कह सके वो भी तब जब हम उसे खुद अपना रहें हो। किसी भी देश का विकास तब सम्भव है जबकि पश्चिम के भौतिकवाद और पूर्व के अध्यातमवाद का सामंजस्यपूर्ण सम्मिश्रण जो समस्त संसार को प्रसन्नता दे सके। आजतक भारत की कोई अपनी शिक्षा निति नहीं है , आज भी शिक्षा प्रणाली में भारत मैकाले की दी हुई पद्धति अपना रहा है। इस तरह की शिक्षा नीति में मानवीय विकास के कई पहलूओं की अनदेखी की गयी है। वहीँ अगर हम मानसिक सुदृढ़त्ता की बात करें तो भौतिकवादी सोच में ये नष्ट होते हुए प्रतीत हो रहें हैं।
यदि हम मानवीय मूल्यों के विकास की बात करें तो वो आध्यात्मिक चिंतन से विकसित होता है , जो कि पाश्चात्य संस्कृति के आधीनता में अस्वीकार्य है। तकनीक का सही उपयोग की जगह उसका दुरूपयोग ने मानवीय रिश्तों में दरार बढ़ाया है , लोगो में भावनात्मकता की कमी साफ़ झलकती है। हर एक इंसान आगे बढ़ने की होड़ में है एक दूसरे से , बिना परिणाम की चिंता किये हुए।
इसलिए हम ये कह सकते हैं कि कोई भी संस्कृति पूरी तरह से दोषपूर्ण नहीं है , बस उसका सदुपयोग करके हम विनाश से बच सकते हैं. मनुष्य का पतन और उत्थान अपने हाथ में है वो किसी संस्कृति का मोहताज नहीं , बस देश को विकासशील से विकसित बनाने के लिए पूर्वी और पश्चिमी का आपसी तालमेल होना जरुरी है। जब उदारीकरण और वैश्वीकरण होंगे तो उसके परिणाम भी हमें ही झेलने होने चाहे उसका रुख पूर्व की ओर जाता हो या पश्चिम की ओर। अब हम अपनी संस्कृति की साख को हिलने न दे ये पूर्ण रूप से मानव पर निर्भर करता है.
Monday, February 25, 2019
भारतीय गैस उद्योग के विकास में मौके और चुनौतियां; डेविड कैरोल, प्रेसिडेंट, आईजीयू और सीईओ जीटीआई
भारतीय गैस उद्योग के विकास में मौके और चुनौतियां; डेविड कैरोल, प्रेसिडेंट, आईजीयू और सीईओ जीटीआई
नई दिल्ली, 25 फरवरी 2019 - राजधानी में 22 फरवरी 2019 को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया था । इसका विषय था, “भारत में प्राकृतिक गैस उद्योग : भारतीय गैस उद्योग में मौके और चुनौतियां”। यह आयोजन पीडीपीयू-जीटीआई भारतीय गैस उद्योग के साथ मिलकर किया गया। इसमें इस क्षेत्र के जाने-माने वक्ताओं ने उद्योग की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की और उसपर प्रकाश डाला।
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| प्राकृतिक गैस उद्योग कार्यशाला २०१९ पीडीपीयू द्वारा आयोजित |
यह कार्यशाला 2017 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की व्यक्त इच्छा का परिणाम था । उस समय उन्होंने कहा था कि भारत में प्राकृतिक गैस के विकास के लिए वे चाहेंगे कि गैस टेक्नालॉजी इंस्टीट्यूट, इलिनोइस और पंडित दीन दयाल उपाध्याय पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी (पीडीपीयू), गांधीनगर के बीच एक गठजोड़ की शुरुआत की जाए।
इस सिलसिले में पीडीपीयू ने अप्रैल 2018 में एक ओपन हाउस का आयोजन किया था। इसमें चर्चा का विषय था, “इंडिया टुवार्ड्स गैस बेस्ड इकनोमी” (भारत गैस आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में)। इसमें डेविड कैरोल, प्रेसिडेंट, आईजीयू और सीईओ जीटीआई ने मौजूद लोगों को संबोधित किया था और भारत के प्राकृतिक गैस क्षेत्र के विकास के लिए अपने विचार तथा दृष्टिकोण साझा किए थे। इस कदम को आगे बढ़ाते हुए, पीडीपीयू और जीटीआई ने अब इस कार्यशाला का आयोजन किया है।
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| आईजीयू के इमीडिएट पास्ट प्रेसिडेंट और सीईओ डेविड कैरॉल |
इंटरनेशनल गैस यूनियन (आईजीयू) के इमीडिएट पास्ट प्रेसिडेंट और सीईओ डेविड कैरॉल ने “प्राकृतिक गैस विकास पर अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य" पर अपने विचार रखे। अपनी प्रस्तुति की शुरुआत उन्होंने 2017 के वर्ल्ड गैस कांफ्रेंस की द्रुत समीक्षा से की और बताया कि दुनिया के हर कोने में और मुख्य रूप से चीन में गैस की मांग काफी बढ़ गई है। यही नहीं, एशियाई स्पॉट बाजार में कीमतें बढ़ गई हैं।
उन्होंने आगे कहा, “2018 के आंकड़े अभी आ रहे हैं पर यह स्पष्ट है कि एशियाई बाजार मांग बढ़ा रहे हैं। और एफएलएनजी प्रील्यूड ने अभी कुछ महीने पहले उत्पादन शुरू किया है तो आपूर्ति पक्ष अच्छा है और अमेरिकी सप्लाई भी बहुत बढ़ गई है। आईईए ने अनुमान लगाया है कि 2040 तक गैस की वार्षिक मांग में
1.6% की वृद्धि होगी। शहरीकरण और शहरी क्षेत्रों में खराब हवा का मामला आबादी के ज्यादातर हिस्से और इसके परिणामस्वरूप इन क्षेत्रों में प्राकृतिक गैस के विकास को प्रभावित कर रहा है।”
गैस टेक्नालॉजी इंस्टीट्यूट में बिजनेस डेवलपमेंट एंड एजुकेशन के रॉड रिनहोल्म ने अमेरिका में गैस उद्योग के परिदृश्य साझा किए। उन्होंने अमेरिकी प्राकृतिक गैस आपूर्ति श्रृंखला का संक्षिप्त विवरण दिया जहां उन्होंने अमेरिका की स्थिति बदलने पर जोर दिया। इस समय अमेरिका गैस का आयात करता है और यह गैस का निर्यात करने वाला देश बन सकता है। और 2019 के अंत तक इसका लक्ष्य इसके निर्यात का दुगना है। उन्होंने कहा, “अमेरिका निरंतर अपने गैस डोमेन में जा रहा है। यह मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बंटा हुआ है – आवासीय, व्यावसायिक और बिजली पैदा करने वाला औद्योगिक गैस।“
डॉ. अनिरबिड सिरकर, प्रोफेसर, स्कूल ऑफ पेट्रोलियम टेक्नालॉजी, पंडित दीनदयाल पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी
डॉ. अनिरबिड सिरकर, प्रोफेसर, स्कूल ऑफ पेट्रोलियम टेक्नालॉजी, पंडित दीनदयाल पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी ने विस्तार से मुख्य जानकारी और गैस उद्योग से जुड़े मुद्दे साझा किए जैसा कि वेब आधारित सर्वे तरीके में हाईलाइट किया गया है। इसे “सर्वे मंकी” कहा जाता है। इस रिपोर्ट में 12 भिन्न गैस कंपनियों के नजरिए पर रोशनी डाली गई। इनमें जीएसपीसी, ओएनजीसी, अडानी गैस जो दो परिप्रेक्ष्य पर आधारित है। इसके अलावा भारतीय गैस उद्योग के लिए मौके और भारतीय गैस उद्योग के विकास की चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया। सिरकर ने कहा, “हम अपनी अर्थव्यवस्था को गैस पर आधारित बनाना चाहते हैं। हमारे पास एक महत्वाकांक्षी योजना है जो 6.5 प्रतिशत से 15 प्रतिशत की भारी वृद्धि के लिए है। गैस का उपयोग तकरीबन सभी क्षेत्र में होता है वह चाहे पवर हो या सीजीडी या उर्वरक। हालांकि, हमारे देश में जो अहम चुनौतियां हैं वह पूर्वी भारत में पर्याप्त गैस आपूर्ति की चुनौती है जबकि प्राकृतिक गैस की कीमत अभी भी एक चुनौती है।”
Wednesday, December 26, 2018
जीरो मूवी रिव्यू
जीरो मूवी अपने नाम के मुताबिक है। इसकी कहानी बउआ नाम के एक बौने किरदार के आसपास घूमती है, जो कि मेरठ का रहने वाला है। बउआ ( शाहरुख़ खान ) को आफिया ( अनुष्का ) नाम की लड़की से प्यार हो जाता है जो कि वैज्ञानिक रहती है और सेरीब्रल पाल्सी नामक रोग से पीड़ित रहती है. दोनों में आसमान ज़मीन सा फर्क है , इसके बाबजूद दोनों की प्रेम कहानी भारत की ज़मीन से उठकर अमेरिका के अंतरिक्ष तक जा पहुंचती है। मूवी में इन दोनों के प्यार के सफरनामे को अलग तरीके से दिखाया गया है. फिल्म में कैटरीना कैफ ( बबीता ) भी है जो नशे में धुत होने के बाबजूद मोम की गुडिया लगी हैं लेकिन उनके पास दर्शको को लुभाने जैसा कोई अहम् भूमिका नहीं थी। इसके साथ ही फिल्म में कई सहकलाकार भी जान डाले हुए हैं।
इस फिल्म की कहानी को हिमांशु शर्मा ने लिखा है और इसका संगीत अजय अतुल ने दिया है.
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अनूठा प्यार |
शाहरुख़ ने जहाँ फैन मूवी की याद ताज़ा की है वही अनुष्का ने वर्फी मूवी में प्रियंका चोपड़ा जोनस के अभिनय की याद दिलाई। काफी कोशिश की अनुष्का ने अपने किरदार को जीवंत करने की जो कि सराहनीय है लेकिन अगर प्रियंका से तुलना की जाये तो फीका रहा उनका किरदार। इस फिल्म में शाहरुख़ ३८ साल के युवा हैं जो अब तक कुंवारे हैं , माँ बाप के साथ रहने की वजह से उन्हें कभी पैसो की दिक्कत नहीं हुई , वरन छोटे से शहर में ३८ साल का कुंवारा लड़का शायद ही मिलता हैं , लेकिन बउआ का कम कद का होना भी एक वजह है जल्दी शादी का न होना।
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बबीता कुमारी का अविश्वसनीय किस बउआ को |
अनुष्का के एक डायलॉग ने दिल छू लिया की रिश्ता और प्यार बराबर में चलता है , मुझे भी इस अवस्था में कोई सही आदमी नहीं मिलने वाला और तुझे भी बौने के रूप में कोई प्यार नहीं कर सकता। बउआ का बौनापन यहाँ मजबूत पक्ष लेकर उभरा वरन आफिया जैसी सुन्दर और होनहार वैज्ञानिक के साथ रिश्ता तय हो जाना , ठीक वैसा ही है जैसे कहानियो में परियां मिल जाती है। इस बीच कहानी का रुख कैटरीना कैफ ( बबीता कुमारी ) की तरफ चला जाता है। बबीता का क्या किरदार है ? बउआ को आफिया का प्यार ज़मीन में मिलेगा या अंतरिक्ष में इसके लिए आपको सिनेमा हॉल जाना होगा । मूवी में मनोरंजन और अच्छा संगीत का मिश्रण है जो कि आपको बोरियत महसूस नहीं होने देगा। कुल मिला के ये मूवी थोड़ा सा अलग हटके है प्यार के अलग साइड इफेक्ट्स और अलग वादे को पुरी करती नज़र आएगी। ज़ीरो का अंत आखिर ज़ीरो में ही हुआ लेकिन बउआ सिंह का कद काफी बड़ा हो गया फिल्म के अंत में। इस कहानी को मैं ५ में से ३ *** रेटिंग देना चाहूंगी।
Tuesday, December 11, 2018
उर्जित का त्यागपत्र - अर्थजगत को झटका
उर्जित रवींद्र पटेल किसी परिचय के मोहताज नहीं , अर्थशास्त्र जगत में उन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त है।इनका जन्म केन्या के नैरोबी( राजधानी ) में हुआ था। भारतीय रिजर्व बैंक के २४ वे गवर्नर बनने से पहले उर्जित आर पटेल केंद्रीय बैंक के डिप्टी गवर्नर थे। ४ सितम्बर २०१६ को इन्हे भारतीय रिजर्व बैंक का गवर्नर बनाया गया था । अचानक हुए नोटबंदी के निर्णय को भी पटेल जी ने बखूबी निभाया। उनकी और उनकी टीम की सुदृढ़ व्यवस्था अर्थशास्त्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। पटेल ने अपने सूझ बुझ से मुद्रा स्फीर्ति को स्थिर बना कर रखा था. अभी पटेल जी का कार्यकाल पूरा होने में ८ महीने बाँकी थे तो अचानक से इस्तीफा दे देना , सरकार और अर्थजगत के लिए एक झटका है। इससे कहीं न कहीं अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। सरकार त्वरित निर्णय नहीं ले सकती कि अगला गवर्नर किसे बनाया जाये। हलाँकि अगर पटेल के कथानुसार सोचा जाये तो उन्होंने इस्तीफा देना व्यक्तिगत मामला बताया है। लेकिन ये पूरी तरह से सच नहीं है , आर बी आई और सरकार में लगातार किसी बात को लेकर खींच तान चल रही थी , लम्बे खींच तान के बाद पटेल जी ने समझौता न करके इस्तीफ़ा का रास्ता इखतियार कर लिया। आर बी आई की स्वायत्तता और कमजोर बैंकों के प्रांप्ट करेक्टिव एक्शन फ्रेमवर्क में रखना जैसे मुद्दों को लेकर सरकार और आर बी आई में तकरार चल रही थी। अभी चुनावी माहौल में राजनीति सरगर्मियां तेज हो रही हैं। इधर पटेल जी का इस्तीफ़ा और दुसरा एग्जिट पोल के नतीजे से सरकार और बाजार को दोहरी मार पड़ सकती है.
कुछ अहम् मुद्दे थे संप्रग सरकार और आर बी आई के बीच जिसे पटेल ने सरकार के सामने रखा था
१. कृषि ऋण माफ़ी योजना
२ भारत में बैंकिंग को बैंकिंग सवामित्व अधिकार न होना
३ मौद्रिक दरों में उतार चढाव
इन मुद्दों के अलावा भी कई ऐसे मुद्दे थे जो टकराव का कारण बने बिना निष्कर्ष निकले।
जैसे आर बी आई प्रशासनिक सुधार , भुगतान प्रणाली के लिए मानक , आर्थिक पूंजी का ढांचा ,नियामकीय पूंजी मानक और पीएसबी बोर्डों पर आर बी आई का चयन।
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उर्जित रवींद्र पटेल |
आर बी आई गवर्नर एक गरिमामयी पद है और इसकी नियुक्ति सरकार करती है।
सूत्रों की माने तो पटेल जी ने अपने आर बीआई के केंद्रीय निदेशक मंत्रिमंडल के निदेशकों का आभार जताया लेकिन सरकार को उन्होंने अनदेखा कर दिया। इससे साफ़ हो गया की इस्तीफे का कारण सिर्फ व्यक्तिगत नहीं है।
लेकिन वहीँ प्रधानमंत्री मोदी जी और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आश्चर्य जताया तो साथ ही साथ उन्होंने उनके कार्य - कुशलता की सराहना भी की।
अब देखना ये होगा की पटेल की जगह कौन लेता है।
Monday, December 10, 2018
ये इश्क़ नहीं आसां बस इतना समझ लीजिये
मेरे किसी दोस्त ने मुझसे कहा कि मुझे आपकी लेखनी से इश्क़ हो गया है , क्या आप इश्क़ पर कुछ लिख सकती हैं ? मैं मन ही मन मुस्कुराई और अपने आप से बातें करने लगी कि अगर हमने इश्क पर कुछ न लिखा तो क्या लिखा। हलाँकि इस विषय पर लिखने की न मेरी उंगलियों में ताकत है और न ही मेरे जेहन में लैला और शीरीं जैसे ज़ज्बात भरे हुए हैं। फिर भी प्रेम को समझने की एक छोटी सी कोशिश होगी मेरी ।
यूँ तो प्रेम की परिभाषा अलग अलग होती है , सभी की अपनी अपनी राय हो सकती है। प्रेम का ही वृहद् रूप इश्क़ या मुहब्बत होता है. नाम चाहे हज़ारो हो किन्तु प्रेम में केवल प्यार ही प्यार होता है. अब सवाल उठता है की प्रेम है क्या ? क्यों होता है ये प्रेम ? क्या सभी प्रेम एक जैसे होते हैं ? तो आइये हम प्रेम के बारे में जानते हैं कि प्रेम क्या है :
प्रेम एक नैसर्गिक प्रक्रिया है जो की आमूमन किसी के भी प्रति पैदा हो सकता। हम यहाँ माँ -बेटे , भाई - बहन , गुरु- शिष्य के बीच के प्रेम की बातें नहीं कर रहे हैं, यहाँ तक की पति- पत्नी का भी प्रेम अलग होता है। ये सारे बंधन वाले प्रेम हैं।
हम बात कर रहे हैं उस प्रेम की जो कोई प्रेमी अपने प्रेयसी से करता है , और उसकी प्रेमिका अपने प्रेमी से करती है। कुछ लोग सोचते हैं कि हम प्यार में कुछ पा लेते है लेकिन नहीं, सच्चे और निश्छल प्रेम में इंसान खुद को खो देता है ठीक वैसे ही जैसे प्रभु की भक्ति में वो खुद को खोता है।
प्रेम का मतलब ही है विलीन हो जाना एक दूसरे में अर्थात मैं न होकर हम हो जाना। यहाँ मैं से हम का मतलब मेरा दैहिक रूप से नहीं है बल्कि उस आत्मा से है जिसे आपको अंगीकार करना है। प्रेम एक तरह से साधना मात्र है , लेकिन बेहद अफ़सोस की आज हर गली कुची में आपको लोग मिल जायेंगे ये कहते हुए कि वो प्रेम में हैं , जबकि वो प्रेम में नहीं हवा के उस बहाव में जहाँ से हम सभी होकर गुजरते हैं अपने जीवन काल में. कुछ लोग अपने जैवकीय (बायोलॉजिकल ) गुणों से मजबूर , कुछ लोग अपने शरीर में होने वाले रासायनिक सन्तुलन (केमिकल बैलेंस ) बिगड़ने से मजबूर तो कुछ आज के बदलते परिवेश से मजबूर। प्रेम मात्र बाह्य आकर्षण नहीं है। स्त्री और पुरुष में सिर्फ बाह्य आकर्षण क्षणिक हो सकता है , लेकिन आत्मा का प्रेम अन्नत हो जाता है। साधारण व्यक्ति के लिए प्रेम को जान पाना उतना ही कठिन है जितना की अँधेरे में किसी चिराग को ढूंढने की कोशिश करना।
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प्रेम एक साधना |
प्रेम में खुद को हारना पडता है , और वहां वो हार भी आपको जीत का एहसास कराते हैं. हारने का अर्थ अपने अहम् को अपने मैं से है, न की बहार की कोई हार से। फिर देखिये कुछ अनछुए पहलु कैसे छुए पहलुओं में तब्दील हो जाता है.
अचानक ही मुझे कुछ पंक्तिया याद आ गयी जिसने भी लिखा है बिल्कुल ही सही लिखा है
" दर्द दिलो के कम हो जाते अगर मैं और तुम हम हो जाते "
आपने शायद पहले भी सुना ही होगा की जबतक हीर खुद को राँझा न समझे और राँझा खुद को हीर तबतक वो सही मायने में इश्क़ है ही नहीं।
" राँझा राँझा करदी वे , मैं आप राँझा होई "
प्रेम इतना सुन्दर होते हुए भी दुःख भरा होता है अक्सर , जो रिश्ते जान से प्यारा होता है कल को बेगाना सा हो जाता है दुखों का सैलाब हमारे सामने होता है। फिर हम उस प्रेम को कोसने लगते हैं की क्यों हुआ था हमे प्रेम ?
कभी लोग मरने की सोचते हैं तो कभी अवसाद ग्रस्त हो जाते हैं। लेकिन मैं कहती हूँ आपसे की आप अगर वो प्यार के खुशनुमे पल याद करेंगे तो आपका प्यार आपको आंसू तो देगा लेकिन उसमे एक खुशी भी महसूस होगी।
याद कीजिये प्रेम का वो पल जब आप उसके या उसकी बातो पर अकेले अकेले मुस्कुरा उठते थे , जब उनकी उँगलियों की पोरे आपके सर पर हाथ फेरती थी तो आपको वो एहसास होता था की दुनियां में गम के बादल ने आपको घेरा ही नहीं है। जबकि ये मात्र एक एहसास था उस वक्त भी और आज भी। परेशानियां तब भी थी आज भी है और कल भी रहेंगी। प्यार न सही जीवन में प्यार के एहसास को महसूस करके ही रोमांचित हो जाइये ताकि फिर से जीने की तम्मना जाग उठे और कुछ कर गुजरने की। ... प्रेम में एक समर्पण होना चाहिए जैसे ईश्वर को आपने कोई वस्तु अर्पित की हो। अगर आपका प्रेम सच्चा और सहृदय वाला होगा तो देर से ही सही आपके प्रेम को सफलता मिलती है.
वहीँ प्रेम का दूसरा पहलु अगर हम देखे तो पाते है की प्रेम सफल होकर भी विफल हो गया। लेकिन मेरे हिसाब से अगर प्रेम दो आत्माओ का मिलन है तो हमेशा सफल है और अमर है। शारीरिक प्रेम आपको पल भर के लिए पूर्णता का एहसास करा सकता है किन्तु वो सही मायने में प्रेम नहीं है। अगर ऐसा होता तो सबसे ज्यादा प्रेम पति और पत्नी के रिश्तों में होना चाहिए था। पति - पत्नी जीवनसाथी होते हैं उसमे एक बंधन होता है एक स्वार्थ निहित प्रेम होता है कही न कही , जबकि प्रेम मुक्ति का मार्ग है जो की हमे पशु से थोड़ा अलग बनाता है एक सच्चा इंसान.. बनाता है आपको। बंधन वाला प्रेम होकर भी जो बंधन रहित हो वही प्रेम है। प्रेम में बस ऐसे ही हादसे होते है की फिर हम कोई अरमान न कर सके , लेकिन जो भी हो पल चाहे खुशी के हो या गम के प्रेम में पलके भीगी ही होती है।
फिर भी ये दिल यही कहता है कि " काँटों से खींच के ये आँचल बंधन ये प्यार का , कि आज फिर जीने की तम्मना है मरने का इरादा है कि तुमसे एक वादा है।
प्रेम का विषय इतना गहरा है की एक पोस्ट में उसे लिखा या समझा नहीं जा सकता।
Friday, December 7, 2018
सर्दियों में भी पाएँ दमकती त्वचा
सर्दियाँ शुरू होते ही हमारी त्वचा बेजान और रूखी होने लगती हैं। यूँ तो हर मौसम में त्वचा की देखभाल करनी चाहिए , पर सर्दियों में हमें त्वचा का ज्यादा ध्यान रखना होता है ताकि हमारी त्वचा हरदम खिली - खिली नज़र आये। इस मौसम में तैलीय (ऑयली ) त्वचा वालो को थोड़ा रहत मिल जाता है पर इसका मतलब ये कतई नहीं है कि उन्हें अपने त्वचा पर ध्यान देने की जरुरत नहीं होती है. सर्दियों में कुछ लोग पानी पीना कम कर देते हैं, पानी की कमी से त्वचा अधिक रूखी होने लगती है।
इस मौसम में बेहतर लोशन और कोल्ड क्रीम के अलावा कुछ घरेलु उपाय भी बेहद कारगर साबित होता है , खुश्की दूर करने के लिए। आइये हम आपको कुछ टिप्स बता रहे हैं जिससे आपकी त्वचा सर्दियों में भी दमकती हुई नज़र आएगी।
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सर्दियों में भी खिली खिली रहे त्वचा |
१ सुबह नहाने के लिए गरम और अधिक ठंढे पानी की जगह आप गुनगुने पानी का उपयोग कर सकते हैं ,साथ ही साथ त्वचा में अधिक नमी बनाये रखने के लिए इसमें तेल ( सरसो या नारियल) की कुछ बुँदे भी मिला सकते हैं ।
२ चेहरा धोने के लिए किसी मृदुल फेस वाश (माइल्ड फेस वाश) का उपयोग कर सकते हैं या मलाई में पांच बून्द नींबू मिलाकर साफ़ कर सकते हैं ,मलाई से जहाँ आपके चेहरे की नमी बनी रहेगी वहीँ नींबू से आपके रोमछिद्र (पोर) साफ़ होंगे।
३. अगर आपकी त्वचा ज्यादा रूखी है तो आप शहद , हल्दी और दो बून्द नीम्बू का इस्तेमाल कर सकते हैं , नीम्बू की अधिक मात्रा आपकी त्वचा को रूखी कर सकता है , वहीँ शहद त्वचा को नर्म और मुलायम बनाता जबकि हल्दी आपकी त्वचा में निखार लाने का काम करता है.
४ इस मौसम में स्क्रब और मुलतानी मिट्टी का उपयोग न के बराबर करे क्योंकि ये आपकी त्वचा को रूखी कर सकतें हैं।
५ नहाने के बाद आप ऑलिव आयल और क्रीम बेस्ड मॉइस्चराइजर लगा सकते हैं ताकि आपकी त्वचा में दिन भर नमी बरकरार रहे।
६ इस मौसम में चेहरे के साथ साथ होठ और एडियों का भी खास ख्याल रखे , इसके लिए सोते समय होठों पर घी या मलाई से मसाज करें और एडियों को साफ़ करके वैसलीन लगाकर जुराबें पहन लें.
७ सबसे खास बात चाय और काफी का सेवन कम करे ताकि हमारा शरीर डिहाइड्रेट न हो
उम्मीद है आपको ये पोस्ट पसंद आया होगा।
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